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Saturday, 30 July 2016

सुनन इब्न माज़ा, जिल्द 3, 915-हसन

✦ अबू दर्दा रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की मेरे मेहबूब सलअल्लाहु अलैही वसल्लम ने मुझे वसीयत फरमाई की अल्लाह के साथ किसी को शरीक ना करना चाहे तुम्हारे टुकड़े टुकड़े कर दिए जाए या तुम्हे आग में जला दिया जाए और फ़र्ज़ नमाज़ को जान बुझ कर कभी मत छोड़ना क्यूंकी जो जानबूझ कर फ़र्ज़ नमाज़ छोड़ दे तो अल्लाह के ज़िम्मे से बरी हो गया (यानी अब वो अल्लाह की पनाह में नही) और शराब ना पीना क्यूंकी शराब हर बुराई की कुंजी (चाबी) है 
सुनन इब्न माज़ा, जिल्द 3, 915-हसन

✦ अल क़ुरान : बेशक नमाज़ अपने मुक़र्रर वक्तो में मोमीनो पर फ़र्ज़ है 
सुरह अन निसा (4) आयत 103

✦ हदीस: अब्दुल्लाह बिन बुरैदा रदी-अल्लाहू-अन्हु ने अपने वालिद से रिवायत किया की रसूल-अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया हमारे और उनके मुनाफिकों के) दरमियान अहद नमाज़ है तो जिसने नमाज़ को छोड़ दिया उसने कुफ्र किया. 
सुनन इब्न माज़ा, जिल्द 1 , 1079 -सही

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